शनिवार, 19 जून 2010

फटकार ..

बहुत बुरा लगा था जब..तुम्हारी पुच्कारने  वाली  ज़बान ने,
पहली बार डांटा था... मुंह में ऊँगली डालने पर..
माँ के दुलार के आगे.. तुम्हारी बात बात की फटकार चुभती थी...
तुम्हारे दफ्तर से लौटने का समय....आजादी छिनने जेसा लगता था....
और वो रिपोर्ट कार्ड वाला तमाचा....अब तक  सबक बनकर गूंजता है यादों में...
थेंक यू ...पापा उन सारी फटकारों के लिए....जिन्होंने मुझे इंसान बना दिया...फ़िर से एक फटकार लगाओ ना... 

1 टिप्पणी:

rashmi ने कहा…

bahut gahari bat kahi aapne
aapke fatkar per thanku ko pad kar har wo beta pani pani hoga jo bhej deta he apane hi mata pita ko oldagehome me
fatkar ke thanku par barambar wah -wah