शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

राम ये कैसा रावण मारा था तुमने....

राम ये कैसा रावण मारा था तुमने....
मरता नहीं.. हर बार मारना पड़ता है....
अबके कोई `राम, बनाओ ना....


2 टिप्‍पणियां:

S.M.MAsum ने कहा…

आप सब को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीकात्मक त्योहार दशहरा की शुभकामनाएं.
आज आवश्यकता है , आम इंसान को ज्ञान की, जिस से वो; झाड़-फूँक, जादू टोना ,तंत्र-मंत्र, और भूतप्रेत जैसे अन्धविश्वास से भी बाहर आ सके. तभी बुराई पे अच्छाई की विजय संभव है.

प्रमोद ताम्बट ने कहा…

पुतला फूँकत जग मुआ
रावण मरा ना कोय
जो फूँके निज अहंकार
रावण क्यूँ पैदा होय।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल
www.vyangya.blog.co.in
http://vyangyalok.blogspot.com
व्यंग्य और व्यंग्यलोक
On Facebook