शनिवार, 22 मई 2010

वृद्धाश्रम


कोई नानी,कोई दादी,कोई माँ और कोई बापू,
सिले कुछ लोरियों के परवरिश के और कुछ बदले,
समेटे झुर्रियों में वक़्त से बिछुड़े हुए लम्हे,
भरे धुंधलाई आंखन में ये ममता के समंदर को,
ज़ुबां की लडखडाहट में दुआ के फूल से झरते,
ये सब अपने ही घर से आंगनों से बेदखल साये,
ये एक छोटे से घर के ख्वाब की ताबीर के सदके.....

6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

मार्मिक!

दिलीप ने कहा…

bhaavnaaon se bharpoor kam shabdon me gehri chot...

Dankiya ने कहा…

dhanywad sameer ji.

Dankiya ने कहा…

dhanywad dilip ji..

rashmi ने कहा…

mere ek ideal person hua karte the per tabhi tak jab tak ki me unhe door se janti thi jab wastvikta se pala pada to laga ki aap ki kavita un ke papa par fit bethati hai

N. L. Shraman ने कहा…

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
तब नौकर था अब मालिक हूँ, तब तेरा था अब मेरा है।
अंधियार हटा आया प्रकाश, अब साँझ नहीं सबेरा है॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
आयु काल व अंत हीन, यह अचेतन मेरा चेतन है।
श्वेत केश अनुभवी साठ, यह अनुभव ही मेरा वेतन है॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
दुनिया के जितने बड़े काम,सबने साठ के बाद किये।
न्यूटन, सुकरात, विनोबा, गांधी , तभी तो हैं आज जिये॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
जीवन वर्षों की उड़ान नहीं, लहराये जवानी सरसों में।
तुम जोड़ो वर्षों को जीवन में,हम जीवन को जोड़े वर्षों में॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
अनंत जीवन के हम बच्चे, जो अंतकाल को न जाने।
अमरत्व नित्यता मुझ में है, हम डरना मरना क्या जाने॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
स्वागत है आगत वर्षों का, दुनिया को मेरी जरूरत है।
खोजोगे तुम भी रोज मुझे ऐसी ही मेरी सूरत है॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
माना कि हम कल ना होंगे, पर गीत हमारा गायेंगे।
हम खायें या ना खायें , पर फल वृक्ष लगाकर जायेंगे॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
हम आश्चर्यजनक हैं लाठी छूटेगी, पर गाँठ न टूटेगी।
हम खास ही हैं टूट जायेगी साँस पर आस न छूटेगी॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
घर बैठ निराश हताश अगर,अपना जीवन खो देगा।
तैरती है लाश सतह पर जो जिन्दा है वह डूबेगा।।
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
जीवन में रुची बढ़ेगी जब स्मृति गुरू पट खोलेगा।
मिल जाये मुर्दा एक बार वह भी उठकर बोलेगा ॥
पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……
मेमोरी गुरू एन एल श्रमण की पुस्तक “ भूलना भूल जाओगे Forget Forgeting ” से साभार