पहली बार डांटा था... मुंह में ऊँगली डालने पर..
माँ के दुलार के आगे.. तुम्हारी बात बात की फटकार चुभती थी...
तुम्हारे दफ्तर से लौटने का समय....आजादी छिनने जेसा लगता था....
और वो रिपोर्ट कार्ड वाला तमाचा....अब तक सबक बनकर गूंजता है यादों में...
थेंक यू ...पापा उन सारी फटकारों के लिए....जिन्होंने मुझे इंसान बना दिया...फ़िर से एक फटकार लगाओ ना...